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Sunday, 16 June 2019

कभी ऐसा हो जाए!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये!
कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये!

धड़कन ये तेज़ चलने लगे,
साँसों की लय बढ़ने लगे।
आँखें टिकी हों रास्ते पर,
नींद से लड़ने लगें।

फिर नींद से लड़ते हुए,
आँखें ये देखें ख़्वाब वो।
जिसमें हों तू और मैं लिए,
फिर दोस्ती की शराब को।

अभी ख़्वाब में है तू खड़ा,
जो सामने आ जाए गर।
एक पल में ये दिल हँस पड़े,
सपना सच्चा हो जाए!!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2....

जो सामने आ जाए तू,
तुझको गले से लगा लूँ मैं।
यारी को रक्खूँ याद बस,
सारे जहाँ को भुला दूं मैं।

तेरे साथ बातों-बात में,
फिर गुज़रे वक़्त में चल पड़ूँ।
फिर दिन पुराने मैं जिऊँ,
मैं फिर सफ़र पे निकल पड़ूँ।

हम साथ में फिर हँस सकें,
तुझे मैं ये फिर से कह सकूँ!
जो यार तुझसे ना मिलूँ,
जीना मुश्किल हो जाए!!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2....

अभी सामने आया नहीं,
आई है बस इसकी ख़बर।
सुनकर जिसे ही है ख़ुशी,
मैं हो गया हूँ बेसबर।

जिस दिन तुझे मिल जाऊँगा,
दिल चैन ये पा जाएगा।
फिर दोस्ती का दिल जो है,
उसको क़रार आ जाएगा।

आँखों में फिर होगा सुकूँ,
जब ख़्वाब सच हो जाएगा।
अब इंतजारी है यही,
तू जल्दी से आ जाए!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2...

- अंशुल।

Thursday, 13 June 2019

Prophecy

Prophecy....

The question is not of today,
But will be asked later some day...
When the mother will ask,
And you will have to say...

You will have to reply,
For all that u did..
That will be stuck to your soul,
U can't get rid...

The scars which u gave,
That mother will save...
Those will be shown to you,
O lusty, greedy, slave...

You won't even get,
The time to repent...
You won't get an extra,
Minute to be spent...

It will be un-viable,
For you to even cry...
And there will be no scenario,
Left to even try...

For all u did life long,
Will come to you in misery...
As you harmed nature,
Made the destruction triggery....

-Anshul Tiwari

Sunday, 9 June 2019

श्री राधा चरण विन्याष्टक

।। श्री राधा चरण विन्याष्टक।।

हौं अति हीन मलीन मति, नहिं जानत हौं कछु कर्म पसारो।
जानत हौं नहिं बेद पुरान न, ग्रंथन्ह को कछु सार बिचारो।।
नाहिं असो बड़ भाग कि पावहुँ, संत को संग, न सद्गुरु द्वारो।
मोरे बिलोकत एक गति, सोई भानुसुता तव एक सहारो।।

कर्म न जानउँ, धर्म न जानउँ, और न मर्म की बात सम्भारो।
पाई जनम नर देह सुपावन, भूलि गयो हरि नाम बिसारो।।
केतिक काल बिताई दियो, जग प्रीति में आपनो आप को हारो।
हे गिरिराजप्रिया! अब एक ही मोर भरोस है तोर सहारो।।

कृष्णसखी ब्रजराज प्रिया, तुम्ह हो हरिदास की नित्य दुलारी।
ठकुरानी बरसाने की, ठाकुर बाँके बिहारी को हो अति प्यारी।।
कृष्ण के प्राण की स्वामिनी हो, रसराज के चित्त पे छाप तिहारी।
तुम्हरी कृपाबल ते दुर्लभ गति पावत होवत जीव सुखारी।।

कृष्ण भए जग के गुरु, देवत ज्ञान, तबै गीता दियो गाई।
हौं अज्ञान की खान हमै कछु बात बड़ी नहिं बूझे बुझाई।।
दीन मलीन हौं बुद्धि से हीन, ये ज्ञान कथा हमको न सुहाई।
श्री हरिदास ने हेतु यही, श्री राधिका नाम की कीरति गाई।।

कान सुनै कितने तरि गै, जिन्ह राधिका नाम को कण्ठ बसायो।
कोई न जग्य न जोग कियो, बस राधे ही राधे को गीत सुनायो।।
बात यही सुनिके मोसों पाँवर, पाप परायण जीव लुभायो।
हाथ पसारके द्वार तिहारे श्री श्यामा जू आपन कष्ट सुनायो।।

ओ ब्रजराज की प्राण प्रिया, अभिराम हो श्याम के नैनन को।
तुम्ह तो बरसाने की वासिनी हो, हिय में हो धरे वृंदावन को।।
अब हौं पे कृपालु मयालु बनौ, मन जोड़ दो श्री हरि चरनन सों।
तुम्ह दीनदयालु कहावत हो, अब दीजो कृपा कछु दीनन को।।

श्री कृष्णप्रिया, वृषभानु लली, सब हाथ तिहारे सम्भारो तुमै।
बिगरे-सुधरे सब भाग मोरे, अब हाथ तिहारे सुधारो तुमै।।
करुणानिधि कर करुना सुधि मोरि करो, हतभाग्य सँवारो तुमै।
यह जीवन नाव समर्पित राधिके! पार करो या मारो तुमै।।

कलि सागर पार उतार दिए, जिन राधिका नाम की नाव चढ़े।
तन, मन, धन, जीवन ,सौंप किशोरी को ,राधे ही राधे को नाम रटै।।
अब कीजो कृपा वृषभानु सुता, मन कृष्ण के चरनों से जाई मिलै।
ठकुरानी निवेदन है इतनो, तुम्ह साथ रहो जोई नाम रटै।।

दोहा:-
राधा मेरी स्वामिनी, मैं राधे को दास।
अब कृपालु हो राधिका, ब्रज में दीजो वास।।

।।इति श्री राधा चरण विन्याष्टक सम्पूर्ण।।
।।श्री राधिकार्पणमस्तु।।

-अंशुल।