उड़े-उड़े अवध में रंग, राम जी रंग खेलें!
उड़े-उड़े अवध में रंग, राम जी रंग खेलें!
सिया, लखन, संग हनुमंत, राम जी रंग खेलें!
सोने की है पिचकारी, जी बन्यो फूल को रंग,
लाल, गुलाबी, नीला, पीला, सबै देख हैं दंग!
नाचें लोग निहाल भए, घर-घर में है आनंद!
सब भूले, सुध-बुध, ढंग! राम जी रंग खेलें!
अवध पुरी लौट रघुनंदन, बरसों बाद बधाई!
पहली होली घर में खेलें राजा राम, बधाई!
पुनः हुई सुख वर्षा देखो, घर-घर खुशियाँ छाईं!
सब बाँटो आज मिठाई! राम जी रंग खेलें!
जन के राजा, सिंहासन पर, देखो पुनः बिराजे,
सभी ओर श्री रामचन्द्र के गूँजे गाजे-बाजे!
सोभा देख अवधपुर की, देवता स्वर्ग में लाजे!
सिय, लखन, पवनसुत साजे! राम जी रंग खेलें!
अबकी होली ऐसी होगी सोचा नहीं कभी था,
रघुवर के संग देखो आनंद दुगना हुआ सभी का,
राजमुकुट पहने सियवल्लभ, सिर अबीर का टीका,
हर रस लागे अब फीका, राम जी रंग खेलें!
उड़े-उड़े अवध में रंग, राम जी रंग खेलें!
सिया, लखन, संग हनुमंत, राम जी रंग खेलें!
-अंशुल तिवारी।