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Sunday, 30 July 2017

तुम्हारा साथ...

तुम्हारा साथ है,
जैसे भरोसा,
भरोसा जो भी होगा,
ठीक होगा।।

तुम्हारा साथ है,
जैसे दिलासा,
दिलासा ये कि मंज़िल,
मंज़िल पास होगी।

तुम्हारा साथ है,
मंदाकिनी-सा,
भरी है जिसमें शीतलता,
अनोखी।

तुम्हारा साथ है,
तारावली-सा,
प्रकाशित जिससे जीवन,
का ये पथ है।

तुम्हारा साथ है,
गीतावली-सा,
है गुंजित गीत-सा हर,
शब्द जिसका।

तुम्हारा साथ है,
जीवन का संबल,
है मुश्किल राह भी,
आसान जिससे।

- अंशुल।।

Friday, 7 July 2017

वक़्त चलता है...

वक़्त चलता है ,साथ उसके यूँ चलते रहिए,
ख़ुद ही ख़ुद के लिए, ख़ुद को भी बदलते रहिए।।

ज़िन्दगी जो भी है, ये आप सँवर जाएगी,
कोशिशें कीजिए, बस कोशिशें करते रहिए।।

एक ही है उसूल बस के यहाँ जीने का,
मंज़िलें पा के, नई राहों पे चलते रहिए।।

ढल न पाए जो ज़िंदगी तुम्हारे साँचे में,
क्या बुरा है कि ख़ुद ही साँचे में ढलते रहिए।।

राह आसान नहीं है तुम्हारे वास्ते तो,
चलते रहिए, न कि घबरा के यूँ टलते रहिए।

- अंशुल।।

अपनी कश्ती को न लहरों के हवाले रखिए!!

अपनी कश्ती को न लहरों के हवाले रखिए,
अपने हाथों में ही पतवार सम्भाले रखिए।।

आंधियाँ जिनको बुझाने में भी नाकाम रहें,
दिल में रोशन ज़रा कुछ ऐसे उजाले रखिए।।

एक अर्से से है तूफ़ान की दस्तक़ दर पर,
हौसला रखिए, यूँ न होठों पे नाले रखिए।।

चैन हर ओर है, राहों में बाहर आई है,
आज के दौर में ये ख़्वाब भी पाले रखिए।।

- अंशुल।।