अपनी कश्ती को न लहरों के हवाले रखिए,
अपने हाथों में ही पतवार सम्भाले रखिए।।
आंधियाँ जिनको बुझाने में भी नाकाम रहें,
दिल में रोशन ज़रा कुछ ऐसे उजाले रखिए।।
एक अर्से से है तूफ़ान की दस्तक़ दर पर,
हौसला रखिए, यूँ न होठों पे नाले रखिए।।
चैन हर ओर है, राहों में बाहर आई है,
आज के दौर में ये ख़्वाब भी पाले रखिए।।
- अंशुल।।
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