hamarivani badge

a href="http://www.hamarivani.com/update_my_blogg.php?blgid=4653" target="_blank">www.hamarivani.com

Tuesday, 28 May 2019

हे सागर!!!

हे अथाह! निःसीम,
जगत के ओर-छोर तक,
फैले सागर,
ओ!! अगाध तुम...
आज बोल दो!!
भेद खोल दो!
मुझे बताओ..…
तुम किस कारण,
क्षण-क्षण में इतने भीषण,
रौरव स्वर में,
क्रंदन करते हो??

क्यूँ इस तरह हुए व्याकुल,
इन चट्टानों पर भाल,
पटकते बस रहते हो??

तुम तो रत्नाकर,
महासिंधु हो!
तुम्हें कमी है कौन बताओ??
पास तुम्हारे संचित कितने रत्नकोश हैं!!
मुक्तामणियों के अगणित आगार,
तुम्हारे चरणों में बेकार पड़े हैं।

ओ ! दुर्लभ तथा अलभ्य वस्तुओं, के रखवाले,
तुम क्यों इतनी बेचैनी से,
यूँ तट तक आकर,
बिन बोले कुछ लौट रहे हो??

मैं बड़ी दूर से आया हूँ,
यों देख तुम्हें, भरमाया हूँ!
ये सोचा नहीं कभी मैंने,
यूँ सब कुछ पाकर भी कोई,
क्या इतना व्याकुल होता है!
क्रंदन करता है ,रोता है??
मैं हतप्रभ होकर,
देख रहा हूँ!
सोच रहा हूँ!
दो पल पास तुम्हारे बैठूँ और सुनूँ तुमसे,
क़िस्सा इस परम वेदना का,
व्याकुलता का, अधीरता का।

पर, मैं तो अभी स्वयं की,
व्याकुलता में डूबा,
भावों के झंझा में उलझा,
भटक रहा हूँ।
विवश भागता फिरता हूँ,
दुर्लभ रत्नों की ही तलाश में!!

मैं फिर आऊँगा पास तुम्हारे,
सुख-दुख सभी सुनूँगा सारे!
तुम धैर्य युक्त हो,
तब तक निज को रोके रखना,
रस्ता तकना!!

-अंशुल तिवारी।

Saturday, 25 May 2019

Mother's agony

Mother's agony...

O my child!
O beloved child!
How I wish I could give you,
The treasures, I used to...
How I wish I could give you,
The gems, I had once....
How I wish I could tell you,
I love you the most!!

O beloved child!!
I wish I could give you,
The sweetest of the fruits,
The purest of the breeze,
All which is precious to keep,
But I'm unable to,
so, as a mother I weep!!

Today I'm forced to live,
with scars on my face!!
Waiting since ages,
for you to embrace!!

Son,
Once I was also pretty and charming,
But now I'm burning in global warming!!
With a burst of population,
Arrived a situation!!
That boosted the heat,
Which is invincible to beat!!
I wish I could fulfill your needs,
But I'm helpless with your deeds!!
You killed forests,
Destroyed greenery,
Turned the Greenlands,
Into a tragic cemetery!!

The gases of green house,
Are rising like a snake...
The crust is depleting!
Resources are at stake!!
O child,
There are so many of you,
But no one to care,
The scene is degrading,
And you will have to stare!!

I despair to see you with meagre,
Shelter ,clothes and food!!!
With such a big population,
You have lesser source of livelihood!!!

I weep to see you lacking,
Long for basic needs,
Fighting each other for,
Casts and creed!!

I wish for all that, I gave,
only a woo...
A small single step,
A favour from you!!

Son,
be kind and control the,
Population,
Or else we will be trapped in,
Such a situation....

We will be ailing in pain,
With nothing to live,
I will be exhausted,
With nothing to give...

-Anshul Tiwari

Tuesday, 14 May 2019

दुविधा

शौक कहता है न सोचूँ ,

बस कहा जो,

कर दिखाऊँ!

और सोचा जो उसे,

हासिल करूँ!

मैं जीत जाऊँ।

ख़्वाब जो भी और जैसा भी,

हुआ,

उसको हक़ीक़त में,

बदलकर,

झोंक कर ख़ुद को इसी,

उत्तेजना में,

स्वप्न गागर, भर सकूँ,

मैं रीत जाऊँ!

पर अगर ऐसा हुआ भी,

घर जला कर,

रौशनी पाई चिराग़ों ने मेरे,

तो क्या हुआ फिर??

आँख ही जब न रहेगी,

कौन देखेगा,

सुहाने ख़्वाब को सच में बदलते।

तो कहो ये दौड़ फिर किसके लिए है?

जान की बाज़ी लगाए,

कोशिशें मुमकिन सभी किसके लिए हैं?

ज़िन्दगी, 

क्या ये लड़ाई है जिसे बस जीतना है?

या, के बस,

हर शौक पूरा कर मुझे यूँ रीतना है?

शौक, सपने, ख़्वाब, चाहत, आरज़ू के,

दरम्याँ मैं हूँ खड़ा,

ये सोचता हूँ!

क्या करूँ मैं, क्या बताऊँ???

-अंशुल तिवारी।

15.05.19

Thursday, 9 May 2019

Mahindra anthem !!

Mahindra anthem song!!

हाँ हम हैं, हाँ हम हैं...x2
हम जोश भरा एक सागर हैं, हिम्मत की एक मिसाल हैं,
हम जो भी करते काम यहाँ, करते हम उसे कमाल हैं।
दुनियाभर में पहचान है ऊँची, ऊँचा अपना नाम है।
हर नामुमकिन को मुमकिन करना, यही हमारा काम है।
सपने सच कर दिखलाए हैं, ऐसी अपनी रफ़्तार है।
है गर्व हमें, सर ऊँचा है, हम महिंद्रा परिवार हैं।।

हम युवा और आज़ाद हमेशा, रग़ में भरे उबाल हैं।
है ख़ून गर्म सर चढ़ बोले, हर क़तरे में ललकार है।
हम लहराते सागर से हैं, हम बहते तेज़ हवाओं से।
मुश्क़िल के पर्वत हार गए, अपनी कोशिश के पाँवों से।
है ज़िम्मेदारी कंधों पर, हिम्मत की हम दीवार हैं।
है गर्व हमें, सर ऊँचा है, हम महिंद्रा परिवार हैं।।

Set the road on fire... x 2

Rap....
(हाँ हाँ ये दुनिया भी, जानती है हमको,
ये मानती है हमको, पहचानती है हमको।
ये ताक़त है हमारी, ये इबादत ही हमारी,
ये क़यामत की है बारी, ये अलामत है हमारी।
जो भी हम कहते हैं वो कर के दिखाते।
हम झंडा india का ऊँचा उठाते।
हम कहते हैं live young live free,
दुनिया को, शोले जीत के दिल में जलाते।
हम राज करें इंडस्ट्री पे,
हैं shark से तेज़ marazzo बनाते।
हम xuv 3oo से,
सड़कों पे देखो आग लगते।
हम रुकते नहीं हैं, हम झुकते नहीं हैं,
हम पत्थर पर उम्मीद उगाते।
हम चीर के दरिया सा सबको दिखाते
हम सबको झुकाएँ, इतिहास बनाते।)

तकनीक नई अपनाते हैं, उत्पादन में सबसे आगे।
हम नए-नए परिकल्प लिए, हर competitor से हैं आगे।
हम कर्म क्षेत्र में अव्वल हैं, दिल में भारत का प्यार है।
है गर्व हमें, सर ऊँचा है, हम महिंद्रा परिवार हैं।।

जो लिया देश से लौटाकर, भारत की शान बढ़ाते हैं।
हम मानवता की सेवा में, ख़ुद अपने हाथ बढ़ाते हैं।
दुनिया में नाम हमारा है, पाया हमने सम्मान है।
US, europe, africa, Australia में ऊँचा नाम है।
हम साथ-साथ बढ़ने का,
हरदम करते सफल विचार हैं।....है गर्व हमें... महिंद्रा परिवार हैं।

अब बात करें हम हरिद्वार की, यहाँ महिंद्रा छाया है।
अपने कर्तव्य और कर्मों से, हमने नाम कमाया है।
गंगा की धरती पर, गंगा-सी, ले तरंग हम चलते हैं।
हरदम आगे बढ़ते रहते, हर कदम rise हम करते हैं।
आँधी, बारिश, तूफानों में भी, पैर न पीछे करते हैं।
TPM  और crusade निभाकर, ख़ुद को बेहतर करते हैं।
है गर्व हमें, हम सभी महिंद्रा, का ही एक विस्तार हैं।
है गर्व हमें, सर ऊँचा है,
हम महिंद्रा हरिद्वार हैं।।
हम महिंद्रा परिवार हैं...

-अंशुल तिवारी।

Saturday, 4 May 2019

ग़ज़ल...गुज़ारिश।।

ग़ज़ल...गुज़ारिश।।

तुम अपने दिल के चराग़ों को तेल तर रक्खो,
भला न सिर्फ़ हवाओं पे ही नज़र रक्खो।

बड़ी हैं मुश्किलें, दुश्वारियाँ भी बेहद हैं,
कठिन है हौसला रखना यहाँ, मग़र रक्खो।

ये है बाज़ार यहाँ, बोलियाँ भी ऊँची हैं,
यहाँ ईमान को अपने टटोलकर रक्खो।

तुम्हें दुनिया सिखा रही है ते उसूल नया,
जो शय है आख़िरी ,उसको ही पेश-तर रक्खो।

बदल गई है रवायत यहाँ पे जीने की,
ज़ुबाँ पे फूल रखो, जिगर में नश्तर रक्खो।

- अंशुल तिवारी।
हरिद्वार
04-05-19