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Friday, 24 April 2026

papa ke liye

 कभी आफ़ताब, कभी चाँदनी बनकर।
कभी चिराग़, कभी रोशनी बनकर।

या, कभी तपाकर अपने आप को भी,
आप कैसे भर देते हैं मेरी आँखों में उजाले।

हाँ, दृश्य जो मैं देखता हूँ,
उसके कारक आप ही हैं।

आप कैसे ये घनी धूप सहकर भी,
बाँटते हैं केवल शीतल छाँह।

शायद मैं इसे कभी समझ नहीं पाऊँगा,
किन्तु मेरे लिए इतना ही जानना काफ़ी है,

कि मैं, आपका ही विस्तार हूँ।

जन्मदिन की अनेक शुभकामनाएँ, पापा।
श्री हनुमान जी हमेशा कृपालु रहें.....#जाके गति है हनुमान की.....

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