समय से चुराकर,
समय से बचाकर।
उठा लो ये लम्हे,
छुपा लो ये लम्हे,
ये लम्हे वही हैं,
जो जुड़कर बनेंगे,
हमारी कहानी के किस्से सुहाने।
इन्हें चुन के रखलो,
ये हैं फूल जिनसे,
महकते रहेंगे सभी दिन पुराने।
यही याद के हैं वो,
बेमोल मोती,
पिरोकर जिन्हें हम सजाएँगे जीवन।
इन्हीं के सहारे बिताएँगे जीवन!!
ये लम्हे नहीं सिर्फ़,
कतरा समय का!!
ये लम्हे तो हैं ज़िन्दगी की निशानी,
इन्हीं से बनी है, इन्हीं से बनेगी,
ज़रा और बेहतर-सी ये ज़िंदगानी।
तुम्हारी-मेरी दास्ताँ,
जो भी होगी,
यही रंग बनकर निखर जाएँगे फिर।
अगर खो गए,
तो बिखर जाएँगे फिर।
उठा लो ये लम्हे,
चुरा लो ये लम्हे।
नहीं पर ये आसाँ,
ज़रा है ये मुश्क़िल,
जो हो साथ तेरा,
तो मिल जाए मंज़िल!!
-अंशुल।।
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