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Monday, 1 July 2019

हर एक आदमी!!!


इस भीड़ में अनजान है, हर एक आदमी।
इस शहर में मेहमान है, हर एक आदमी।

शोहरत का शहर है यहाँ है रंग की बहार,
फिर भी तो परेशान है, हर एक आदमी।

किस्से हैं यहाँ हर गली, इंसाँ की फ़तह के,
अंदर से पशेमान है, हर एक आदमी।

जिसमें न हैं जज़्बात, वफ़ा, दोस्ती ज़रा,.
दुनियावी वो सामान है, हर एक आदमी।

दुनिया में मेरा नाम बड़ा है, वजूद है,
कितना बड़ा नादान है, हर एक आदमी।

ऊपर से ज़िन्दगी के जश्न, रोज़ दिखावे,
अंदर से तो बेजान है, हर एक आदमी।

बाज़ार की रौनक में इतना डूब गया है,
अब खो चुका पहचान है,हर एक आदमी।

 सच्चाई, वफ़ा, इश्क़, सभी तो निकल गए,
ख़ालीa ye-सा अब मकान है,  हर एक आदमी।

- अंशुल तिवारी
28.06.19
21:44 (मुम्बई)

Sunday, 16 June 2019

कभी ऐसा हो जाए!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये!
कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये!

धड़कन ये तेज़ चलने लगे,
साँसों की लय बढ़ने लगे।
आँखें टिकी हों रास्ते पर,
नींद से लड़ने लगें।

फिर नींद से लड़ते हुए,
आँखें ये देखें ख़्वाब वो।
जिसमें हों तू और मैं लिए,
फिर दोस्ती की शराब को।

अभी ख़्वाब में है तू खड़ा,
जो सामने आ जाए गर।
एक पल में ये दिल हँस पड़े,
सपना सच्चा हो जाए!!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2....

जो सामने आ जाए तू,
तुझको गले से लगा लूँ मैं।
यारी को रक्खूँ याद बस,
सारे जहाँ को भुला दूं मैं।

तेरे साथ बातों-बात में,
फिर गुज़रे वक़्त में चल पड़ूँ।
फिर दिन पुराने मैं जिऊँ,
मैं फिर सफ़र पे निकल पड़ूँ।

हम साथ में फिर हँस सकें,
तुझे मैं ये फिर से कह सकूँ!
जो यार तुझसे ना मिलूँ,
जीना मुश्किल हो जाए!!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2....

अभी सामने आया नहीं,
आई है बस इसकी ख़बर।
सुनकर जिसे ही है ख़ुशी,
मैं हो गया हूँ बेसबर।

जिस दिन तुझे मिल जाऊँगा,
दिल चैन ये पा जाएगा।
फिर दोस्ती का दिल जो है,
उसको क़रार आ जाएगा।

आँखों में फिर होगा सुकूँ,
जब ख़्वाब सच हो जाएगा।
अब इंतजारी है यही,
तू जल्दी से आ जाए!!

कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2...

- अंशुल।

Thursday, 13 June 2019

Prophecy

Prophecy....

The question is not of today,
But will be asked later some day...
When the mother will ask,
And you will have to say...

You will have to reply,
For all that u did..
That will be stuck to your soul,
U can't get rid...

The scars which u gave,
That mother will save...
Those will be shown to you,
O lusty, greedy, slave...

You won't even get,
The time to repent...
You won't get an extra,
Minute to be spent...

It will be un-viable,
For you to even cry...
And there will be no scenario,
Left to even try...

For all u did life long,
Will come to you in misery...
As you harmed nature,
Made the destruction triggery....

-Anshul Tiwari

Sunday, 9 June 2019

श्री राधा चरण विन्याष्टक

।। श्री राधा चरण विन्याष्टक।।

हौं अति हीन मलीन मति, नहिं जानत हौं कछु कर्म पसारो।
जानत हौं नहिं बेद पुरान न, ग्रंथन्ह को कछु सार बिचारो।।
नाहिं असो बड़ भाग कि पावहुँ, संत को संग, न सद्गुरु द्वारो।
मोरे बिलोकत एक गति, सोई भानुसुता तव एक सहारो।।

कर्म न जानउँ, धर्म न जानउँ, और न मर्म की बात सम्भारो।
पाई जनम नर देह सुपावन, भूलि गयो हरि नाम बिसारो।।
केतिक काल बिताई दियो, जग प्रीति में आपनो आप को हारो।
हे गिरिराजप्रिया! अब एक ही मोर भरोस है तोर सहारो।।

कृष्णसखी ब्रजराज प्रिया, तुम्ह हो हरिदास की नित्य दुलारी।
ठकुरानी बरसाने की, ठाकुर बाँके बिहारी को हो अति प्यारी।।
कृष्ण के प्राण की स्वामिनी हो, रसराज के चित्त पे छाप तिहारी।
तुम्हरी कृपाबल ते दुर्लभ गति पावत होवत जीव सुखारी।।

कृष्ण भए जग के गुरु, देवत ज्ञान, तबै गीता दियो गाई।
हौं अज्ञान की खान हमै कछु बात बड़ी नहिं बूझे बुझाई।।
दीन मलीन हौं बुद्धि से हीन, ये ज्ञान कथा हमको न सुहाई।
श्री हरिदास ने हेतु यही, श्री राधिका नाम की कीरति गाई।।

कान सुनै कितने तरि गै, जिन्ह राधिका नाम को कण्ठ बसायो।
कोई न जग्य न जोग कियो, बस राधे ही राधे को गीत सुनायो।।
बात यही सुनिके मोसों पाँवर, पाप परायण जीव लुभायो।
हाथ पसारके द्वार तिहारे श्री श्यामा जू आपन कष्ट सुनायो।।

ओ ब्रजराज की प्राण प्रिया, अभिराम हो श्याम के नैनन को।
तुम्ह तो बरसाने की वासिनी हो, हिय में हो धरे वृंदावन को।।
अब हौं पे कृपालु मयालु बनौ, मन जोड़ दो श्री हरि चरनन सों।
तुम्ह दीनदयालु कहावत हो, अब दीजो कृपा कछु दीनन को।।

श्री कृष्णप्रिया, वृषभानु लली, सब हाथ तिहारे सम्भारो तुमै।
बिगरे-सुधरे सब भाग मोरे, अब हाथ तिहारे सुधारो तुमै।।
करुणानिधि कर करुना सुधि मोरि करो, हतभाग्य सँवारो तुमै।
यह जीवन नाव समर्पित राधिके! पार करो या मारो तुमै।।

कलि सागर पार उतार दिए, जिन राधिका नाम की नाव चढ़े।
तन, मन, धन, जीवन ,सौंप किशोरी को ,राधे ही राधे को नाम रटै।।
अब कीजो कृपा वृषभानु सुता, मन कृष्ण के चरनों से जाई मिलै।
ठकुरानी निवेदन है इतनो, तुम्ह साथ रहो जोई नाम रटै।।

दोहा:-
राधा मेरी स्वामिनी, मैं राधे को दास।
अब कृपालु हो राधिका, ब्रज में दीजो वास।।

।।इति श्री राधा चरण विन्याष्टक सम्पूर्ण।।
।।श्री राधिकार्पणमस्तु।।

-अंशुल।

Tuesday, 28 May 2019

हे सागर!!!

हे अथाह! निःसीम,
जगत के ओर-छोर तक,
फैले सागर,
ओ!! अगाध तुम...
आज बोल दो!!
भेद खोल दो!
मुझे बताओ..…
तुम किस कारण,
क्षण-क्षण में इतने भीषण,
रौरव स्वर में,
क्रंदन करते हो??

क्यूँ इस तरह हुए व्याकुल,
इन चट्टानों पर भाल,
पटकते बस रहते हो??

तुम तो रत्नाकर,
महासिंधु हो!
तुम्हें कमी है कौन बताओ??
पास तुम्हारे संचित कितने रत्नकोश हैं!!
मुक्तामणियों के अगणित आगार,
तुम्हारे चरणों में बेकार पड़े हैं।

ओ ! दुर्लभ तथा अलभ्य वस्तुओं, के रखवाले,
तुम क्यों इतनी बेचैनी से,
यूँ तट तक आकर,
बिन बोले कुछ लौट रहे हो??

मैं बड़ी दूर से आया हूँ,
यों देख तुम्हें, भरमाया हूँ!
ये सोचा नहीं कभी मैंने,
यूँ सब कुछ पाकर भी कोई,
क्या इतना व्याकुल होता है!
क्रंदन करता है ,रोता है??
मैं हतप्रभ होकर,
देख रहा हूँ!
सोच रहा हूँ!
दो पल पास तुम्हारे बैठूँ और सुनूँ तुमसे,
क़िस्सा इस परम वेदना का,
व्याकुलता का, अधीरता का।

पर, मैं तो अभी स्वयं की,
व्याकुलता में डूबा,
भावों के झंझा में उलझा,
भटक रहा हूँ।
विवश भागता फिरता हूँ,
दुर्लभ रत्नों की ही तलाश में!!

मैं फिर आऊँगा पास तुम्हारे,
सुख-दुख सभी सुनूँगा सारे!
तुम धैर्य युक्त हो,
तब तक निज को रोके रखना,
रस्ता तकना!!

-अंशुल तिवारी।

Saturday, 25 May 2019

Mother's agony

Mother's agony...

O my child!
O beloved child!
How I wish I could give you,
The treasures, I used to...
How I wish I could give you,
The gems, I had once....
How I wish I could tell you,
I love you the most!!

O beloved child!!
I wish I could give you,
The sweetest of the fruits,
The purest of the breeze,
All which is precious to keep,
But I'm unable to,
so, as a mother I weep!!

Today I'm forced to live,
with scars on my face!!
Waiting since ages,
for you to embrace!!

Son,
Once I was also pretty and charming,
But now I'm burning in global warming!!
With a burst of population,
Arrived a situation!!
That boosted the heat,
Which is invincible to beat!!
I wish I could fulfill your needs,
But I'm helpless with your deeds!!
You killed forests,
Destroyed greenery,
Turned the Greenlands,
Into a tragic cemetery!!

The gases of green house,
Are rising like a snake...
The crust is depleting!
Resources are at stake!!
O child,
There are so many of you,
But no one to care,
The scene is degrading,
And you will have to stare!!

I despair to see you with meagre,
Shelter ,clothes and food!!!
With such a big population,
You have lesser source of livelihood!!!

I weep to see you lacking,
Long for basic needs,
Fighting each other for,
Casts and creed!!

I wish for all that, I gave,
only a woo...
A small single step,
A favour from you!!

Son,
be kind and control the,
Population,
Or else we will be trapped in,
Such a situation....

We will be ailing in pain,
With nothing to live,
I will be exhausted,
With nothing to give...

-Anshul Tiwari

Tuesday, 14 May 2019

दुविधा

शौक कहता है न सोचूँ ,

बस कहा जो,

कर दिखाऊँ!

और सोचा जो उसे,

हासिल करूँ!

मैं जीत जाऊँ।

ख़्वाब जो भी और जैसा भी,

हुआ,

उसको हक़ीक़त में,

बदलकर,

झोंक कर ख़ुद को इसी,

उत्तेजना में,

स्वप्न गागर, भर सकूँ,

मैं रीत जाऊँ!

पर अगर ऐसा हुआ भी,

घर जला कर,

रौशनी पाई चिराग़ों ने मेरे,

तो क्या हुआ फिर??

आँख ही जब न रहेगी,

कौन देखेगा,

सुहाने ख़्वाब को सच में बदलते।

तो कहो ये दौड़ फिर किसके लिए है?

जान की बाज़ी लगाए,

कोशिशें मुमकिन सभी किसके लिए हैं?

ज़िन्दगी, 

क्या ये लड़ाई है जिसे बस जीतना है?

या, के बस,

हर शौक पूरा कर मुझे यूँ रीतना है?

शौक, सपने, ख़्वाब, चाहत, आरज़ू के,

दरम्याँ मैं हूँ खड़ा,

ये सोचता हूँ!

क्या करूँ मैं, क्या बताऊँ???

-अंशुल तिवारी।

15.05.19