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Wednesday, 28 March 2018

तेरी याद आई...

एक अज़ीज़ दोस्त, हम मिजाज़, हम ख़्याल, हम-प्याला, हम-निवाला यार के नाम.....(ये लफ्ज़ कुछ भी नहीं है तेरे आगे)

जब कभी दिल मेरा घबराया तेरी याद आई,
आज जब जाम उठाया तो, तेरी याद आई।

जब कभी सोग में डूबा मैं आँख भर सी गई,
मुझे तह-ए-दिल से यार, तेरी याद आई।

पास हैं लोग बहुत से मगर न जाने क्यों,
बारहा दिल को मेरे सिर्फ तेरी याद आई।

जब कभी भी हुआ घायल मैं चोट खाकर के,
बनके मरहम ज़हन में, यार तेरी याद आई।

यार के दिल को सिर्फ़ यार से ही राहत है,
दिल जो दुनिया ने जलाया तो, तेरी याद आई।

वक़्त बे वक़्त ठहाके, हँसी वो पागल सी,
वक़्त वो याद जो आया, तो तेरी याद आई।

साँस दर साँस मेरे दिल में तू भी आता है,
साँस के साथ मेरे यार तेरी याद आई।

एक हिस्सा मेरे वजूद का तुझमें गुम है,
क्या कहूँ यार बहुत मुझको तेरी याद आई।

तू भले कुछ भी कहे यार ये तेरा हक है,
सच मैं कहता हूँ बहुत यार तेरी याद आई।

Sunday, 25 March 2018

तस्वीर खिंचवाओ प्यारे।

आज के समय में प्रसिद्ध होना अत्यंत आवश्यक है, चाहे जिस प्रकार हो किन्तु होना अनिवार्य है।
प्रस्तुत है निम्नलिखित विधि, मौजूदा हालात में प्रसिद्धि पाने की।
विश्वास कीजिए कितना सरल है।
(व्यंगात्मक रचना)

करो तुम काम यों कितने ही न्यारे,
मगर तस्वीर भी खिंचवाओ प्यारे।

न केवल खींच अपने पास रक्खो,
वरन्, अख़बार में छपवाओ प्यारे।

नहीं माँगें जो संपादक महोदय,
स्वयं जाकर उन्हें दे आओ प्यारे।

अरे पढ़-लिख के तुम मत वक़्त काटो,
किसी ऊँचे क्लब में जाओ प्यारे।

नज़र आयोजकों पर रखो पैनी,
जहाँ हों, तुम लपककर जाओ प्यारे।

करो बातें यहाँ की, और वहाँ की,
बस उनकी हाँ में हाँ, मिलाओ प्यारे।

यूँ ही बिन बात के, फल-फूल लेकर,
कभी अध्यक्ष के घर जाओ प्यारे।

करो तारीफ़ इतनी, जैसे बस वे,
स्वयं भगवान हैं, बतलाओ प्यारे।

वो आमंत्रित करें या न करें पर,
स्वयं तुम गोष्ठियों में जाओ प्यारे।

प्रभावी लोग जो कुछ भी सुनाएँ,
तुरत जयगान उनका गाओ प्यारे।

प्रशंसा के बड़े पुल उनके बाँधो,
पड़ो चरणों में, बलि बलि जाओ प्यारे।

वहाँ से पर न खाली हाथ लौटो,
ज़रा तस्वीर भी खिंचवाओ प्यारे।

कराओ फ़्रेम, फिर सबको दिखाओ,
जगत से तुम, प्रसिद्धि पाओ प्यारे।

- अंशुल तिवारी
(अप्रैल, 2017/ पुणे)

Wednesday, 21 March 2018

वो जो ठहरा...

वो जो ठहरा, सो मिट गया देखो,
ज़िन्दगी दरिया की, रवानी है।

आज फिर हमें पार जाना है,
आज फिर समंदर तूफ़ानी है।

कोई भी चुन ले राह, और चल दे,
उम्र क्या सोच में बितानी है।

आज ये फ़ैसला होगा बस के,
जान लेनी है या लुटानी है।

हारना तय हो फिर भी खेलेंगे,
आज किस्मत भी आज़मानी है।

ख़्वाब ताबीर तक नहीं पहुँचे,
बस यही दिल को परेशानी है।

कोशिशें कीजिए, कुछ तो होगा,
यही सबक-ए-ज़िन्दगानी है।

-अंशुल।

Thursday, 1 March 2018

।।छंद।।

(1)

नासिका के आदि में, विराजती युगल जोरी,

वाम और दक्षिण की, छटा अति न्यारी है।।

जिनपे प्रसन्न हो वे, धन्य अनुभूति करें,

गोचर हों जो वे निर्वाण, अधिकारी हैं।।

तपती धरा को जैसे, त्राण देती बरखा है,

आकुल हृदय हित तैसे ही सुखारी है।।

प्यारी मनोहारी इस जोरि को विलोकत ही,

शोभा दूज चन्द्र की भी, जात बलिहारी है।।

(2)

नवल कमल खिल गए जैसे वाटिका में,

नयनों की जोरि समरूप ये बनाई है।।

पुष्प बीच गंध जिस भाँति है निवास करे,

मद की पिटारी दृग मध्य त्यों समाई है।।

पा गए जो दृष्टिपात, आप्तकंठ भाग्यवन्त,

भूरि-भूरि नयनों की महिमा ते गाई है।।

झील से गहन इन नयनों ने देखो आज,

प्रभुता समुद्र की भी, पल में भुलाई है।।

-अंशुल।।