आज के समय में प्रसिद्ध होना अत्यंत आवश्यक है, चाहे जिस प्रकार हो किन्तु होना अनिवार्य है।
प्रस्तुत है निम्नलिखित विधि, मौजूदा हालात में प्रसिद्धि पाने की।
विश्वास कीजिए कितना सरल है।
(व्यंगात्मक रचना)
करो तुम काम यों कितने ही न्यारे,
मगर तस्वीर भी खिंचवाओ प्यारे।
न केवल खींच अपने पास रक्खो,
वरन्, अख़बार में छपवाओ प्यारे।
नहीं माँगें जो संपादक महोदय,
स्वयं जाकर उन्हें दे आओ प्यारे।
अरे पढ़-लिख के तुम मत वक़्त काटो,
किसी ऊँचे क्लब में जाओ प्यारे।
नज़र आयोजकों पर रखो पैनी,
जहाँ हों, तुम लपककर जाओ प्यारे।
करो बातें यहाँ की, और वहाँ की,
बस उनकी हाँ में हाँ, मिलाओ प्यारे।
यूँ ही बिन बात के, फल-फूल लेकर,
कभी अध्यक्ष के घर जाओ प्यारे।
करो तारीफ़ इतनी, जैसे बस वे,
स्वयं भगवान हैं, बतलाओ प्यारे।
वो आमंत्रित करें या न करें पर,
स्वयं तुम गोष्ठियों में जाओ प्यारे।
प्रभावी लोग जो कुछ भी सुनाएँ,
तुरत जयगान उनका गाओ प्यारे।
प्रशंसा के बड़े पुल उनके बाँधो,
पड़ो चरणों में, बलि बलि जाओ प्यारे।
वहाँ से पर न खाली हाथ लौटो,
ज़रा तस्वीर भी खिंचवाओ प्यारे।
कराओ फ़्रेम, फिर सबको दिखाओ,
जगत से तुम, प्रसिद्धि पाओ प्यारे।
- अंशुल तिवारी
(अप्रैल, 2017/ पुणे)
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