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Wednesday, 28 March 2018

तेरी याद आई...

एक अज़ीज़ दोस्त, हम मिजाज़, हम ख़्याल, हम-प्याला, हम-निवाला यार के नाम.....(ये लफ्ज़ कुछ भी नहीं है तेरे आगे)

जब कभी दिल मेरा घबराया तेरी याद आई,
आज जब जाम उठाया तो, तेरी याद आई।

जब कभी सोग में डूबा मैं आँख भर सी गई,
मुझे तह-ए-दिल से यार, तेरी याद आई।

पास हैं लोग बहुत से मगर न जाने क्यों,
बारहा दिल को मेरे सिर्फ तेरी याद आई।

जब कभी भी हुआ घायल मैं चोट खाकर के,
बनके मरहम ज़हन में, यार तेरी याद आई।

यार के दिल को सिर्फ़ यार से ही राहत है,
दिल जो दुनिया ने जलाया तो, तेरी याद आई।

वक़्त बे वक़्त ठहाके, हँसी वो पागल सी,
वक़्त वो याद जो आया, तो तेरी याद आई।

साँस दर साँस मेरे दिल में तू भी आता है,
साँस के साथ मेरे यार तेरी याद आई।

एक हिस्सा मेरे वजूद का तुझमें गुम है,
क्या कहूँ यार बहुत मुझको तेरी याद आई।

तू भले कुछ भी कहे यार ये तेरा हक है,
सच मैं कहता हूँ बहुत यार तेरी याद आई।

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