भाषण, वक्तव्य विधा का सबसे सरल प्रकार है (व्यंगात्मक रूप से)।
अक्सर लोग इसे बड़ी सहजता से दे भी देते हैं।
शायद देने में यही वो पहली वस्तु होगी लोग जिसे किसी दूसरे को देने को हमेशा, एक पैर पर तैयार रहते हैं।
एक ख़याल इस बात पर,
----------------------------------
सुना हमने जो भाषण, कहा उनसे ठहर जाओ।
के जो समझा रहे हो तुम, वो ख़ुद करके दिखाओ।
जो है अंगार पे चलना, कदम पहले बढ़ाओ।
लटकना है जो सूली पर, तो हाथ अपना उठाओ।
ज़हर का घूँट पीना है, तो तुम प्याला उठाओ।
मियाँ हँसकर ज़रा बोले, न यूँ हमको फ़ँसाओ।
इन्हें बातें ही रहने दो, हकीकत न बनाओ।
अगर कुछ फ़ायदा चाहो, हमारे साथ आओ।
चढ़ो मंचों पे हाँको, ख़याल के घोड़े दौड़ाओ।
जो श्रोता हैं उन्हें वादों का घिस, चन्दन लगाओ।
ज़माना है सुनो मत, सुनाकर life बनाओ।
- अंशुल।

