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Monday, 14 December 2020
दुनिया सारी ये ख़्वाब है!
Wednesday, 2 December 2020
ये लिखने वालों की भीड़ है!
Tuesday, 1 December 2020
जो लिखी नहीं गई!
Friday, 27 November 2020
वो क्या कोई कवित्त है?
Wednesday, 25 November 2020
उन्मुक्त स्वर।
Monday, 1 July 2019
हर एक आदमी!!!
इस भीड़ में अनजान है, हर एक आदमी।
इस शहर में मेहमान है, हर एक आदमी।
शोहरत का शहर है यहाँ है रंग की बहार,
फिर भी तो परेशान है, हर एक आदमी।
किस्से हैं यहाँ हर गली, इंसाँ की फ़तह के,
अंदर से पशेमान है, हर एक आदमी।
जिसमें न हैं जज़्बात, वफ़ा, दोस्ती ज़रा,
दुनियावी वो सामान है, हर एक आदमी।
दुनिया में मेरा नाम बड़ा है, वजूद है,
कितना बड़ा नादान है, हर एक आदमी।
ऊपर से ज़िन्दगी के जश्न, रोज़ दिखावे,
अंदर से तो बेजान है, हर एक आदमी।
बाज़ार की रौनक में इतना डूब गया है,
अब खो चुका पहचान है,हर एक आदमी।
सच्चाई, वफ़ा, इश्क़, सभी तो निकल गए,
ख़ाली-सा अब मकान है, हर एक आदमी।
-अंशुल तिवारी
28.06.19
21:44 (मुम्बई)
Sunday, 16 June 2019
कभी ऐसा हो जाए!!
कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये!
कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये!
धड़कन ये तेज़ चलने लगे,
साँसों की लय बढ़ने लगे।
आँखें टिकी हों रास्ते पर,
नींद से लड़ने लगें।
फिर नींद से लड़ते हुए,
आँखें ये देखें ख़्वाब वो।
जिसमें हों तू और मैं लिए,
फिर दोस्ती की शराब को।
अभी ख़्वाब में है तू खड़ा,
जो सामने आ जाए गर।
एक पल में ये दिल हँस पड़े,
सपना सच्चा हो जाए!!!
कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2....
जो सामने आ जाए तू,
तुझको गले से लगा लूँ मैं।
यारी को रक्खूँ याद बस,
सारे जहाँ को भुला दूं मैं।
तेरे साथ बातों-बात में,
फिर गुज़रे वक़्त में चल पड़ूँ।
फिर दिन पुराने मैं जिऊँ,
मैं फिर सफ़र पे निकल पड़ूँ।
हम साथ में फिर हँस सकें,
तुझे मैं ये फिर से कह सकूँ!
जो यार तुझसे ना मिलूँ,
जीना मुश्किल हो जाए!!!
कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2....
अभी सामने आया नहीं,
आई है बस इसकी ख़बर।
सुनकर जिसे ही है ख़ुशी,
मैं हो गया हूँ बेसबर।
जिस दिन तुझे मिल जाऊँगा,
दिल चैन ये पा जाएगा।
फिर दोस्ती का दिल जो है,
उसको क़रार आ जाएगा।
आँखों में फिर होगा सुकूँ,
जब ख़्वाब सच हो जाएगा।
अब इंतजारी है यही,
तू जल्दी से आ जाए!!
कभी ऐसा हो जाए, हाँ!!
कभी ऐसा हो जाये! X 2...
- अंशुल।