होली की शुभकामनाएँ,
ब्रज की होली का एक दृश्य,
धूरि सा उड़ा गुलाल, मुख हुआ लाल लाल,
खेल-खेल रंग सारी लाज बिसराई है।
मारी पिचकारी मोरी रंग दीनी सारी देखो,
जसोदा को लाल कैसी करता ढिठाई है।
साँवरे सलोने तेरे नैनन के वार ने तो,
नख सिख संग मोरी आत्मा भिगाई है।
रंग-रसिया ने रँग दियो आज बृज सारा,
धन्य हो कन्हाई कैसो होली ये मनाई है।
-अंशुल तिवारी।
No comments:
Post a Comment