उलझनें ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा होती हैं, ऐसा हिस्सा जो न हो तो भी मुसीबत और हो तो भी....
एक तरफ़ ज़िन्दगी का है जोखम,
एक तरफ़ शायरी का पेचो ख़म।
एक तरफ़ चोट, दर्द,आहें हैं,
एक तरफ़ ज़ख़्म के लिए मरहम।
एक तरफ़ ठेस, गर्म साँसें हैं,
एक तरफ़ बरसता सुकूँ हरदम।
एक तरफ़ सूख गया दरिया भी,
एक तरफ़ बारिशों का है मौसम।
एक तरफ़ गर्म लू के झोंके हैं,
एक तरफ़ ठंडी हवा, है मद्धम।
जाऊँ किस ओर यही सोचता हूँ,
फ़ैसला जंग से नहीं है कम।
-अंशुल।
No comments:
Post a Comment