hamarivani badge

a href="http://www.hamarivani.com/update_my_blogg.php?blgid=4653" target="_blank">www.hamarivani.com

Sunday, 16 October 2016

क़िस्से, सपने, बातें.....

इतने क़िस्से, इतने सपने,इतनी बातें,
तुम,
कैसे, किधर, कहाँ रखती हो???

क्या, इन छोटी-सी आँखों में??
पलकों के किवाड़ लगाकर,
सब सहेजकर रखती हो।

और, बनाती हो उनसे तुम,
अपना एक अलग ही बादल।

फिर,
आकुल-व्याकुल मुझसे मिलकर,
बिन देरी के, पलक झपकते।

मुझ पर बरसाती हो जाने,
कितने क़िस्से, कितने सपने, कितनी बातें।

मैं नख-शिख तक भीगा तुमसे,
ठगा खड़ा सुनता रहता हूँ।

और तभी लग जाती हो तुम,
पुनः संजोने, क़िस्से, सपने, बातें.....।

- अंशुल तिवारी, पुणे।
  16.10.2016

2 comments:

  1. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete
  2. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete