( अक्सर वे लोग जो बिन कुछ सोचे टिप्पणियाँ देकर किसी का आकलन करते हैं, छींटे कसते हैं, ताने देते हैं.
किन्तु जीवन मार्ग पर हो रहे प्रतिपल संघर्ष की दुरूह परिस्थियियों से अंजान ही रहते हैं।
उनसे मेरा संबोधन...)
तुम जो हर हार पर मेरी,
चैन पाते हो।
हर ठोकर पर हो खुश,
इतराते हो।
जब भी बिखरता हूँ मैं,
मुस्कुराते हो।
चैन पाते हो।
हर ठोकर पर हो खुश,
इतराते हो।
जब भी बिखरता हूँ मैं,
मुस्कुराते हो।
बड़े नादान हो,
शायद भूल जाते हो।
शायद भूल जाते हो।
बैठे तुम भी हो ,
वक़्त की बिसात पर।
न चाल पर तुम्हारा वश है,
न हालात पर।
वक़्त की बिसात पर।
न चाल पर तुम्हारा वश है,
न हालात पर।
तुम भी प्यादों की तरह,
चले जाओगे।
वक़्त के हाथों ही,
छले जाओगे।
चले जाओगे।
वक़्त के हाथों ही,
छले जाओगे।
बिसात फिर बदलेगी,
फिर नई बात होगी।
आज गर शह हुई है,
तो कल मात होगी।
फिर नई बात होगी।
आज गर शह हुई है,
तो कल मात होगी।
-अंशुल तिवारी।
Yorker
ReplyDeleteYorker
ReplyDeleteYorker means???
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