कौन कहता है?.
ज़रूरत है मुझे...
भीड़ की, या किसी हुजूम की ही!
टोलियाँ अब जो मेरे पास नहीं,
न हों वे!
लोग अब जो सभी अनजान हैं,
अनजान रहें!
कौन कहता है?
बिन समूह रंग उड़ते नहीं!!
कौन कहता है?
बिन हुजूम रंग खिलते नहीं!!
मैंने अपने घर में,
आज बनाए हैं रंग,
अपनी मेहनत के साथ,
लिए तुम्हारा ही संग!
कल है होली,
इनको ख़ूब मैं लुटाऊँगा,
रंग जितने हैं, भरे हाथ से,
उड़ाऊँगा,
लाल, पीले, हरे, नीले,
सभी मिलाकर मैं,
कल के दिन,
ख़ूब तयारी से मैं,
ख़ुद अकेला ही,
एक दुनिया को रँग आऊँगा!!
-अंशुल।
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