hamarivani badge

a href="http://www.hamarivani.com/update_my_blogg.php?blgid=4653" target="_blank">www.hamarivani.com

Sunday, 3 March 2019

अस्तित्व

मैं मिट्टी की पैदावार हूँ!
पड़ा था अंश मैं बनके धरा का,
मिला आकार मुझे कुम्हार से,
तपाया काल की भट्टी ने मुझको,
दृढ़ तभी हो सका शायद,
अन्यथा बह गया होता,
समय की जलधार से!!

जो नहीं होता यहाँ पर,
और मैं होता कहीँ तो!
रूप लेकर मैं नया ख़ुद,
खोजता ख़ुद को कहीँ तो!

तब कहानी और होती,
तब रवानी और होती,
भाग्य ये होता अलग,
ये ज़िंदगानी और होती।

कुछ पलों के फेर ने, ये कर दिखाया,
यूँ दिया आकार, यूँ मुझको बनाया।

याद है सबकुछ, कहूँगा,
फिर कभी विस्तार से!!....(समय की जलधार से)....

मैं हुआ जो भी,
हुआ मुझसे यहाँ जो भी!
महज़ संयोग है,
ये योजना मेरी नहीं है!!

है किसी की प्रेरणा,
ये है किसी की योजना,
मुझको चलाता राह जो,
अंजान-सी है।

कोई है जो फ़ैसले लेता है मेरे,
कोई है जो राह में है फूल रखता,
या कभी कंटक उठाकर फेंकता है।

जानता हूँ मैं नहीं हूँ बस अकेला,
खेलता है साथ मेरे, कोई तो उस पार से!!

अतः, मैं ही बस नहीं हूँ, एक कारण,
है नहीं एकाकी ये अस्तित्व मेरा।

कोई मेरे साथ हरदम जी रहा है,
साँस लेता साथ मेरे ही रहा है।

मैं नहीं हूँ जानता वह कौन है जो,
चल रहा है साथ फिर भी मौन है जो।

क्या पता, यूँ छुप रहा, वह कौन है??
रू-ब-रू जो है, सदा मेरी कथा के सार से!!

सत्य बस मेरा यही है,
मैं धरा का एक हिस्सा।
लिख चुका विधिकार जिसका,
अनगिनत में एक किस्सा।

उस कथा पर चल रहा,
मैं पार उसको कर रहा हूँ।
जेब में अनुभव, भले या,
अनभले सब भर रहा हूँ।

जो मिला मुझको, कथा में,
था मेरी लिक्खा हुआ वो।
क्या किया मैंने अभी तक,
जो कि ख़ुद सोचा हुआ हो??

ये महज़ संयोग है,
जो मैं बना हूँ!

हो गया था तय बहुत पहले ही जैसे,
कुछ किया मैंने नहीं तो क्या कहूँ अधिकार से!!

-अंशुल तिवारी।



No comments:

Post a Comment