नव वर्ष।
पतझड़ के झड़े पात,
बीती बोझिल सी रात।
कोकिल के कंठ से फिर,
फूटा नव युगल राग।
आयो मंगल प्रभात,
नवल तेज, कांति लिए।
बरस रहा है प्रकाश,
अद्भुत सी शांति लिए।
छिटक पड़ी ज्यों नभ की,
रौशनी भरी गागर।
धूप की निकली धारा,
फैल गया उजियारा।
जागे हैं नींद से फिर,
उद्यम, बल, शील, ज्ञान।
करने निर्माण नवल,
एक जुट हुए प्राण।
आनंद भरपूर हुआ,
गूंज है गीत नया।
आया है वर्ष नया,
मन छायो हर्ष नया।
भूलें जो बीत गया,
तज दें जो रीत गया।
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।
-अंशुल।
No comments:
Post a Comment