होली पर रंग भरी अयोध्या की झाँकी।
हनुमत धावें रंग भक्ति के लगाए और,
लखन ने आज रंग सेवा के लगाए हैं।।
भरत ने त्याग रंगा, शत्रुघन शौर्य रंगे,
कपिराज आज मीत रंग रंगे आए हैं।।
सुत प्रेम रंग रँगी माता श्री कौसल्या आज,
पिता दसरत्थ रंग गर्व के लगाए हैं।।
निज जन हेतु प्रीत पावन के रंग रँगे,
जानकी रमण आज फूले न समाए हैं।।
अवध निवासी जन आनंद मगन सब,
रंग सुख-स्नेह के गगन भर छाए हैं।।
ऐसो मनहर देख देख दृश्य हतप्रभ,
देव, देवलोक तज, अवध में आए हैं।।
इंद्र संग देवदल, नृत्य में मगन सब,
जान के ये बात, ब्रम्हदेव हर्षाए हैं।।
कालहुँ के काल महाकाल, प्रेम रंग मय,
झूम झूम रूप नटराज का बनाए हैं।।
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