अपनी उम्मीद सजाए रखना।
यूँ न इस दिल को बुझाए रखना।
रास्ते ख़त्म भी हो जाएंगे,
जोश क़दमों का बनाए रखना।
जहाँ बदल गया बाज़ारों में,
ज़मीर अपना बचाए रखना।
वो आज खुश है मेरे आने से,
खुदा! भरम ये बनाए रखना।
ज़माना देखकर कुरेदेगा,
दिलों के ज़ख्म छुपाए रखना
ठोकरें ही जो दिल को दें उनसे,
भला क्या दिल को लगाए रखना।
लौट कर आऊँगा , वादे को मेरे,
घर की चौखट पे चरागों सा जलाए रखना।
-अंशुल।
No comments:
Post a Comment