किस्से...
सुना था जब ज़िन्दगी में कुछ समझ न आये...तो कोई किस्सा पढ़ो या सुनो।
किस्से तुम्हारा हाथ पकड़कर तुम्हे तुम्हारी तनाव भरी दुनिया के चंगुल से निकाल कर ले जाएंगे अपनी दुनिया में...किस्सों की दुनिया में।
जहाँ तुम देखोगे वो सब जो कभी देखा ही नहीं तुमने, या सुना भी नहीं...कभी-कभी वो जो तुम चाहते थे हमेशा ही...जिसे पाने के लिए चल भी पड़े थे, पर एक कड़क आवाज़ सुनकर वापस लौट आये थे।
दिखेगा वो सपना भी जो हमेशा तुम्हारे भीतर पलता रहा, अमरबेल की तरह तुम्हारे विचार का थोड़ा-सा पानी पीकर ज़िंदा रहा, मरा नहीं।
जिसे तुमने हमेशा किसी पुराने कपड़े की तरह मन के दराज़ में सबसे नीचे ठूस दिया था!
किस्से तुम्हें ले जाएँगे वहाँ जहाँ तुम रहोगे, किसी नए इंसान की तरह, जैसे नए देश में नया नागरिक हो बिना पहचान पत्र के, या नए स्कूल में आया बच्चा बिना रोल नम्बर के। केवल तुम और तुम...न अतीत होगा, न भविष्य...सिर्फ तुम्हारे ख़्याल, चाहतें, तमन्नाएं वो भले जितनी असम्भव हों...मुक़म्मल होंगी....।
किस्से तुम्हें यकीन दिलाएंगे तुम्हारे अस्तित्व का,तुम्हें तुम्हारे होने का अहसास कराएंगे!! जिसे तुम भूलने लगे हो।
किस्से तुम्हारे साथी बनेंगे, साथ बैठकर बातें करेंगे तुमसे...तुम्हारी बातें! दूसरों की बातें! इधर की बातें! उधर की बातें!
मैंने ये सुना है...कभी तुम भी अकेलापन महसूस करो तो आना किस्सों की दुनिया में!!
कहानियों के लोक में!!
-अंशुल तिवारी।
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