मैं भागता हूँ।।
कभी कुछ पा जाने को,
किसी का हो जाने को।
कभी तो रूठ जाने को ,
कभी उसको मनाने को।
कभी दिल की सुनाने को,
कभी कुछ गुनगुनाने को।
कभी आंसू बहाने को,
तो कभी मुस्कुराने को।
मैं भागता हूँ,,
बाहों में सामाने को,
या पलकों पे उठाने को।
कभी कुछ पल चुराने को,
या फिर सब कुछ लुटाने को।
कभी बस डूब जाने को,
या उठ कर पार जाने को।
कभी कुछ याद करने को,
कभी कुछ भूल जाने को।
मैं भागता हूँ,,
कहीं पर पहुँच जाने को,
या वापस लौट आने को।
मैं भागत हूँ,,
कभी सब छोड़ जाने को,,
और कभी,,,......खुद से ही।
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