hamarivani badge

a href="http://www.hamarivani.com/update_my_blogg.php?blgid=4653" target="_blank">www.hamarivani.com

Sunday, 13 January 2019

तुम आ जाओ!!

रात गहरी भी हो चली,
है अब,
और, हवा चल रही है,
ज़ोरों की।
सर्द मौसम है,
रास्ते ख़ाली!
है जगा शहर में,
नहीं कोई!
सिर्फ़ मैं, नींद से,
नहीं हारा।
जागता हूँ, ये रात,
काटता हूँ!
ख़्याल,
बोझिल-से हुए जाते हैं।
ऊँघकर, पलक भी झपकाते हैं।
ओस!
ख़्वाबों पे जम रही है अब!!
कल सुना है कि,
सुबह फिर होगी!
धूप बनकर ही,
तुम भी आ जाओ।

- अंशुल तिवारी
(13.01.19/हरिद्वार)

No comments:

Post a Comment